- किसी तरह अपने ग़मो को भुलाये बैठे थे, वो आये और उन्होंने हमे फिर ये याद दिला दिया की आप इतने गुमसुम क्यों है।
- लोगो का क्या है वो तो बोलते ही रहते है। हमें अगर आगे बढ़ना है तो इन सब से ऊपर उठना होगा।
- सरकारी दफ्तर के चक्कर लगा लगा कर जब पैर थक जायेंगे, तभी बुढ़ापे की पेंशन हाथ में आएगी। यही मायाजाल है इस संसार का ।
- काम के वक़्त तो सब नज़र आते हैं , पर जब ख़ुद पर गुजरती है, तब कोई सुनने को तैयार नहीं होता।
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